Dengue in Noida: नोएडा में बढ़े डेंगू जैसे लक्षण वाले मरीज, स्वास्थ्य विभाग कर रहा मलेरिया की जांच, प्राइवेट अस्पताल फुल

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नोएडा
इन दिनों डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और बुखार से पीड़ित मरीजों में एक और समस्या देखने को मिल रही है। बुखार से पीड़ित कुछ मरीजों में डेंगू टेस्ट निगेटिव आ रहा है लेकिन प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं। नोएडा में रोजाना करीब 100 मामले ऐसे आ रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों का डेंगू वाला इलाज किया जा रहा है।

आईएमए के प्रेसिडेंट डॉ. सुनील अवाना ने बताया कि निजी अस्पतालों में एक तिहाई बुखार के मरीज आ रहे हैं। इनमें बुखार के अलावा डेंगू के मरीज भी मिल रहे हैं लेकिन करीब हर अस्पताल में रोजाना ऐसे 2, 3 मरीज मिल रहे हैं जिनकी डेंगू रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।

20,000 तक हो रही प्लेटलेट्स
सभी अस्पताल में कुल मिलाकर करीब 80 से 100 मरीज इस परेशानी के मिल रहे हैं। मरीजों में 20 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर जम्बोपैक लगाया जाता है। 40 हजार से अधिक प्लेटलेट्स होने पर अधिक पानी पीने, गिलोय का पानी, नारियल पानी, पपीता आदि का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

एक महीने में 2200 जांचें
तेजी से फैलते बुखार से निपटने के लिए अस्पतालों की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है। बिसरख सीएचसी में पिछले एक महीने के अंदर लगभग 2200 मलेरिया की जांच की गई जिसमें सिर्फ दो मरीज मिले। सीएचसी में डेंगू की जांच की सुविधा ना होने की वजह से संभावित मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

सिर्फ मलेरिया की कर रहे जांच
बिसरख ओपीडी में 300 मरीजों की क्षमता है। जिसमें हर रोज लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा लोग बुखार का इलाज कराने आ रहे हैं। चिकित्सक बुखार के मरीज में लक्षण दिखने पर पहले मलेरिया की जांच कर रहे हैं। यहां मलेरिया की जांच के लिए रैपिड और स्लाइड दोनों ही व्यवस्था मौजूद है। रोज 30 से 35 मरीजों की मलेरिया जांच की जा रही है। पिछले एक महीने में 2200 मरीजों की जांच की गई जिसमें से दो मरीज मलेरिया से पीड़ित मिले। ओपीडी में हर रोज बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बिसरख सीएचसी में जल्द ही सीबीसी जांच की भी सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

निजी अस्पतालों पर खेल करने का आरोप
एक तरफ बुखार का प्रकोप थम नहीं रहा है और दूसरी तरफ डेंगू, मलेरिया मरीजों के लिए आफत बना हुआ है। स्थिति यह है कि डेंगू मरीजों के नाम पर निजी अस्पताल भी खिलवाड़ कर रहे हैं। डेंगू मलेरिया के पॉजिटिव मरीजों का डेटा स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध नहीं करवाते। संदिग्ध बताकर इलाज करते रहते हैं लेकिन मरीज को बताते हैं कि वह डेंगू पॉजिटिव हैं। स्वास्थ्य विभाग भी निजी अस्पतालों से डेंगू मरीजों का ब्यौरा नहीं मांगता है।

मरीजों से भरे प्राइवेट अस्पताल
जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कुल 13 डेंगू मरीजों की सूची उपलब्ध करवाई है। जबकि निजी अस्पतालों के बेड डेंगू, मलेरिया के मरीजों से भरे हैं। सेक्टर 62 स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि उनके यहां इस समय डेंगू के कुल 10 मरीज भर्ती हैं। वहीं सेक्टर 27 स्थित एक निजी अस्पताल में इस समय डेंगू के 6 मरीज भर्ती हैं।

मरीजों को सस्पेक्टेड मानकर इलाज किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा के मुताबिक नमूनों की क्रॉस जांच के बाद डेंगू मरीजों की सही संख्या स्पष्ट होती है। सभी निजी और सरकारी अस्पतालों से रैपिड किट से जांच के बाद मरीजों के नमूने भी मांगे गए हैं।

सबसे ज्यादा मरीज डेंगू के आ रहे
आईएमए के प्रेसिडेंट डॉ. सुनील अवाना ने बताया कि सभी निजी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में एक तिहाई मरीज बुखार, टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया के हैं। इनमें भी डेंगू के मरीज सबसे ज्यादा हैं। डेंगू मरीज की पुष्टि होने के बाद निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग को डेटा उपलब्ध करवा देते हैं। सभी निजी अस्पतालों में डेंगू जांच सुविधा भी उपलब्ध है।

एलाइजा टेस्ट के लिए जिला अस्पताल भेजे जाते हैं सैंपल
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में अब तक 45 और 49 रैपिड टेस्ट पॉजिटिव मरीजों की एलाइजा जांच हुई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में 42 और शिशु अस्पताल में 59 मरीजों की जांच हुई है। जिला अस्पताल में रैपिड किट से 974 की जांच हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 13 पॉजिटिव मरीजों की जानकारी उपलब्ध करवाई है। अब तक एलाइजा किट से 101 लोगों की जांच की जा चुकी है। डॉ. सुनील शर्मा के मुताबिक रैपिड टेस्ट से सीएचसी, पीएचसी पर भी जांच हो जाती है लेकिन एलाइजा टेस्ट के लिए सैंपल जिला अस्पताल भेजते हैं।



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