कॉफी को बेहतर दवा मानता है आयुर्वेद, एक्सपर्ट से जानें Coffee पीने के फायदे और नुकसान

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नेशनल कॉफी एसोसिएशन के अनुसार, कॉफी दुनिया में सबसे अधिक डिमांड की जाने वाली चीजों में से एक है। कॉफी पीने का इतिहास एक इथियोपियाई बकरी चराने वाले के साथ शुरू हुआ था, जिसने पहली बार कॉफी बीन्स के प्रभावों की खोज की थी। कल्दी नाम का के चरवाहा जब अपनी बकरियों को चराने मैदान में गया तो देखा कि उसकी बकरियों ने किसी जंगली पौधे को चबा लिया है और इसके बाद वे जोर-जोर से कूदने लगीं। उसे लगा शायद बकरियों ने किसी नशीले पौधे को खा लिया है जिस वजह से वे कूद-फांद कर रही हैं और इसके बाद चरवाहा ने अपने एक लोकल पादरी को इस बारे में बताया।

तब पादरी ने फलियों को उबाला और इस ड्रिंक का सेवन किया, जिसके बाद उनमें शाम को एनर्जी आ गई, चुकी की थी जो हर रोज सुस्त महसूस करते थे। पादरी के बाद बाकी साथियों सभी ने कॉफी बीन का ड्रिंक पीना शुरू कर दिया और फिर धीरे-धीरे दुनिया भर के लोग इसे एनर्जी का स्रोत मानने लगे। इस आर्टिकल में हम आपको आयुर्वेद के अनुसार, कॉफी पीने के फायदे और साइड इफेक्ट्स बता रहे हैं।

​नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाती है कॉफी

कॉफी बीन पॉलीफेनोल एक्टीविटी का एक पावरहाउस है। पॉलीफेनोल्स पौधों में पाए जाने वाले यौगिक होते हैं जिनमें हाई एंटीऑक्सीडेंट एक्टीविटी होती है, जो नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों का अंदर से मुकाबला कर सकते हैं। फ्री रेडिकल्स या कहें अस्थिर अणु (unstable molecules) डीएनए और प्रोटीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हमें इनसे बचाते हैं।

​रोज कॉफी पीने के फायदे

  • कॉफी पीने से शरीर में अलर्टनेस आ जाती है।
  • दिमाग बेहतर तरीके से कार्य करता है।
  • सोचने-समझने की शक्ति दुरुस्त हो जाती है और स्किल में सुधार होता है।
  • टाइप टू डायबिटीज का जोखिम कम रहता है। (अगर बिना शुगर के ली जाए)
  • मनोभ्रंश (Lower risk of dementia) और पार्किंसंस रोग का जोखिम कम रहता है।
  • डिप्रेशन का खतरा भी कम रहता है।
  • लिवर डैमेज और कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम कम रहता है।

​कॉफी से साइड इफेक्ट्स होते हैं?

डायटीशियन से लेकर तमाम डॉक्टर्स भी कॉफी पीने के साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी देते हैंदी है। कॉफी पीने से ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन बढ़ सकता है। हालांकि, रिसर्च इस रिस्क का कथित तौर पर समर्थन नहीं करती हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में बताया गया है कि दो सप्ताह तक नियमित रूप से 2 से 3 कप कॉफी पीने शरीर इसे एडजेस्ट करने लगता है और इससे हाई ब्लड प्रेशर का ज्यादा नहीं देखा गया।

हाई ब्लड प्रेशर को खतरनाक माना जाता है क्योंकि इससे हृदय (cardiovascular) और गुर्दे की बीमारी (kidney disease) हो सकती है। हालांकि, अमेरिकन जर्नल के एक अध्ययन में पाया गया कि महिलाओं में शॉर्ट टर्म के लिए ब्लड प्रेशर का खतरा रहता है बावजूद इसके कॉफी पीने से स्ट्रोक होने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, कॉफी के कंपोनेंट्स दवाओं को मेटाबोलाइज करने की शरीर की केपेसिटी को भी प्रभावित कर सकते हैं।

​आयुर्वेद के अनुसार कॉफी

आयुर्वेद कॉफी को सबसे अच्छी दवा के रूप में देखता है। बाकी दूसरी दवाओं की तरह इसके प्रभावों की निगरानी करना भी जरूरी है। कॉफी शरीर में गर्म उत्तेजक प्रभाव के लिए जानी जाती है। यह हमारे शरीर की एनर्जी को बढ़ावा दे सकती है, डाइजेशन को उत्तेजित कर सकती है और रक्तचाप बढ़ा सकती है।

अपने कुछ गुणों के जरिए कॉफी शरीर के दोषों के लिए फायदेमंद हो सकती है लेकिन अगर इसका कम मात्रा या कहें कि मॉडरेट फॉर्म में सेवन किया जाए तब। जीवोत्तमा आयुर्वेद केंद्र के डॉ. शरद कुलकर्णी M.S (Ayu),(Ph.D.) के अनुसार, अगर आप कम मात्रा यानी आधा कप कॉफी पीते हैं तो इससे कोई हानि नहीं होगी लेकिन अधिक मात्रा में ने आपके दोष बढ़ सकते हैं।

​वात, पित्त और कफ पर कॉफी का प्रभाव

वात: डॉ. कुलकर्णी कहते हैं कि वात दोष वाले लोगों को ए कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। कॉफी वात को कम कर सकती है। इसकी बजाए पाचन अग्नि को गर्म करने (digestive fire) और आंत को उत्तेजित करने के लिए आप अदरक की चाय का विकल्प चुन सकते हैं। कॉफी पीने से आपका ध्यान भंग हो सकता है या रात में सोने में कठिनाई हो सकती है।

पित्त: शरीर में मौजूद पित्त गर्म और प्रतिस्पर्धी (competitive) होते हैं। जो लोग इस दोष से ग्रसित हैं उन्हें कॉफी से बचना चाहिए। इस दोष में कॉफी एसिड अत्यधिक गुस्से, सिरदर्द और एसिडिटी का कारण बन सकती है।

कफ: एक मजबूत कफ प्रभाव वाले व्यक्ति के लिए कॉफी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे लोग अगर कॉफी का अधिक सेवन करते हैं तो वे न सिर्फ सुबह बल्कि पूरे दिन सुस्त महसूस करेंगे। हालांकि, कॉफी कफ दोष वाले लोगों में ऊर्जा को प्रोत्साहित करने में मदद करने के साथ-साथ भोजन के बाद पाचन को बढ़ावा दे सकती है।



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