उत्तरायण 15 को: भीष्म को पिता शांतनु ने दिया था इच्छा मृत्यु का वरदान, महाभारत युद्ध के बाद भीष्म ने उत्तरायण पर ही क्यों त्यागी थी देह

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14 घंटे पहले

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इस साल मकर संक्रांति की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। कई जगहों पर 14 जनवरी को और कहीं-कहीं 15 जनवरी को ये पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के साथ ही उत्तरायण भी होता है यानी इस दिन से सूर्य अपनी स्थिति बदलकर दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायण का भीष्म पितामह से गहरा संबंध है। उन्होंने अपनी मृत्यु के लिए इसी दिन का चुनाव किया था।

द्वापर युग में महाभारत युद्ध के 58 दिनों के बाद भीष्म पितामह ने देह त्यागी थी। भीष्म को उनके पिता शांतनु ने इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। युद्ध खत्म होने के बाद भी भीष्म ने देह त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक का इंतजार किया था। इस संबंध में उज्जैन के भागवत कथाकार और ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा ने बताया कि उत्तरायण से देवताओं के दिन की शुरुआत होती है और जो लोग इस दिन देह त्यागते हैं, उन्हें मोक्ष मिलता होती है। मोक्ष के बाद आत्मा को फिर से जन्म नहीं लेना पड़ता है। भीष्म भी मोक्ष पाना चाहते थे, इसी वजह से उन्होंने मृत्यु के लिए उत्तरायण का दिन चुना था।

उत्तरायण पर जानिए महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह से जुड़ी खास बातें…

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